
दो दिन से लगातार राजस्थान विधानसभा में चल रहा ड्रामा शुक्रवार को चरम पर पहुंच गया, जब विधायकों और मार्शलों में हाथापाई हो गई। चार विधायक घायल हैं जिनमें एक पूर्व मंत्री भी हैं। विपक्ष में बैठी भाजपा के सचेतक के निलंबन पर ये सारा ड्रामा गुरुवार से ही विधानसभा में चल रहा है। मार्शल सदन से नेताओं को जबरन बाहर निकालते हैं और वे लड़ते है झगड़ते हैं , शायद ऐसे तो बच्चे भी नहीं झगड़ते। गांव से विधानसभा की कार्रवाई देखने के लिए आने वाले एक सज्जन कहते हैं ये हमारे नेता हैं, पर ये तो ऐसे झगड़ते हैं जैसे हम गांव-ढाणी में भी नहीं झगड़ते।
ये कैसी सरकार है जहां पर गृहमंत्री अपने विरोध करने वाले विरोधी विधायक के बारे में गाली देकर बात करते है। कुछ विधायक जिन्हें निलंबित किया जाता है वे जानबूझ कर विधानसभा में जमे रहते हैं सिर्फ इसलिए कि उन्हें एक मौका मिला है पब्लिसिटी का, खुद को पहचान दिलवाने का , एक फायर ब्रांड नेता की इमेज को जिसे वो किसी कीमत पर खोने नहीं देना चाहते।
एक तरफ सत्ता है जो हर उस आदमी और विधायक को सदन से बाहर करवाना चाहते हैं जो उसका विरोध करता है। दूसरी तरफ विपक्ष है जो हर हाल में विधानसभा को कार्रवाई रोके रखना चाहता है। ऐसे मे प्रश्न ये उठाता है कहां है हम लोग। हम लोग जिन्होंने इन लोगों को अपना प्रतिनिधि चुनकर उस सदन तक पहुंचाया है जहां वो हम जैसे लाखों करोड़ों लोगों की बात करते हैं, उनके लिए क्या सही है और क्या गलत , ये तय करते हैं। कानून बनाते हैं। लेकिन आखिर ये सब होता कहां हैं। जिन कानूनों और विधेयकों पर इन लोगों को चर्चा करनी होती है वे बिना चर्चा के ही पढ़े हुए मान लिए जाते हैं। विपक्ष के वाकआउट में ये बिल और बजट पास कर दिए जाते हैं।
हम अपने खून पसीने की कमाई से टैक्स देते हैं जिन पर ये सरकारें और विधानसभा में बैठने वाले केवल कार्रवाईयों में ही खर्च कर देते हैं करते धरते कुछ नहीं बस हमारे पैसे पर ये लोग ऐश करते हैं और काम के नाम पर झगड़ा।
आखिर ये कैसे लोग हैं जिन्हें हमने सत्ता के शिखर पर बिठाया है, क्या वे वाकई सत्ता के लायक हैं या फिर लड़ने झगड़ने के। ये कैसा सदन है, जहां पर काम कम होता है गतिरोध ज्यादा। जहां सदन में जाने से पहले ही यह तय कर लिया जाता है कि सदन की कार्रवाई नहीं चलने दी जाएगी। ये सब देख सुनकर बार बार यही प्रश्न गूंजता है कि ये कैसे लोग हैं जिन्हें हमने सत्ता पर बिठाया है , क्या हमें ऐसा कोई अधिकार नहीं मिल सकता कि जैसे हम इन्हें सत्ता के शिखर पर बिठाते हैं वैसे ही हम इन्हें सत्ता से गिरा भी दें। क्या वाकई ऐसा नहीं हो सकता।

17 comments:
दुर्भाग्यपूर्ण घटना!
निन्दनीय!
sharmnaak ghatana ......
pakee chamadee ke hai ye log .............
Democracy{zy) is the govt. of the fool, for the fool and by the fool.
हर शाख पे उल्लू बैठा है ,अंजामे गुलिस्ताँ क्या होगा
शुक्र है लोगों ने इस विषय पर सोचना तो शुरू किया |झाल्लेविचारानुसार लोग मिलते जायेंगे और कारवाँ बनता जाएगा|कारवाँ जब बनेगा तो समस्या का हल भी निकल ही आयेगा|
शिखा जी ने सही कहा:
हर शाख पे उल्लू बैठा है ,अंजामे गुलिस्ताँ क्या होगा
आपकी बात सोलह आना सही है लेकिन मुझे दो बातों पर कुछ कहना है। एक यह कि आपने लिखा कि हमारे पैसे से। अर्थात जनता के टेक्स के पैसे से। मेरा यह कहना है कि यदि भारत में सारी जनता अपना धर्म समझकर वाकयी टेक्स देती तो शायद हमारी विधानसभा और संसद में ऐसी स्थिति ही पैदा नहीं होती। आज केवल कुछ प्रतिशत लोग ही टेक्स देते हैं इसलिए सारी जनता मौन रहती है। दूसरी बात की हम इन्हें चुनते हैं। इसमें भी जनता वोट डालने नहीं जाती। यदि जाती तो उनकी आवाज में दम होता और आज देश की यह दुर्गति नहीं होती। जिस दिन इस देश की जनता जागरूक हो जाएगी उस दिन हमारे प्रतिनिधि मर्यादा में रहने को स्वत: ही मजबूर हो जाएंगे।
शिखा जी ने तो खैर सही बात कह ही दी.. पर मैं डा. साहिबा की बात से भी सहमति रखता हूँ.. कि यदि भारत में सारी जनता अपना धर्म समझकर वाकयी टेक्स देती तो शायद हमारी विधानसभा और संसद में ऐसी स्थिति ही पैदा नहीं होती।
बेशर्मी की चादर जिसने ओढ़ ली हो,शर्म की रोशनाई उनपर कोई दाग नही लगा सकती...
आखिर हम लानत भेजने के सिवा और कर भी क्या सकते हैं....
aapne bilkul sahi likha hai ,shikha ji ki baat se main bhi sahamat hun.
आपसे सहमत हूँ।
aap bilkul sahi kah rahi hain ..par...????
Ab shayad Baba Ramdev Ji Ka Bharat Swabhiman yah mahol badal De 2014 me !! Apka kya kyal hein !
how true
मैं सच कह रहा हूँ आपका
युगों युगों से अनुत्तरित प्रश्न कुछ
ही दिनों में उत्तरित हो जायेगा मुझे
हैरत है आपका शौक किताबें पङना
है फ़िर भी आपको इसका उत्तर नहीं
मिला . आप मेरा ब्लाग एक बार देख
लें फ़िर आपको बहुत उत्तर मिल जायेंगे
अन्यथा मैं तो निश्चित ही आपको उत्तर
ही नहीं बताऊँगा बल्कि आपको आपके
द्वारा ही प्रूफ़ कराने का तरीका बताऊँगा
.तेरा मेरा मनवा कैसे एक होई रे ..तू
कहता है कागज की लेखी मैं कहता हूँ
आंखिन की देखी ..शुभकामनांए
satguru-satykikhoj.blogspot.com
Good One. Keep it up.
काफी ब्लाग झाकने के बाद एक मिला जिसमे कुछ अपने विचार से मेल खाता कुछ था....
एक बार हमारे ब्लाग को देखे शायद बात में कुछ दम दिखे शब्बा खैर
सतीश कुमार चौहान भिलाई
satishkumarchouhan.blogspot.com
satishchouhanbhilaicg.blogspot.com
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