Monday, November 12, 2007

ना अभी ब्लॉग डिलीट नहीं करूंगी

बहुत दिनों से सोच रही हूं कि कुछ लिखूं पर इच्छा नहीं हुई। पिछले दो दिन तो ऐसे बीते कि एकबारगी तो ब्लाग ही डिलीट करने वाली थी, पर जब तक जिन्दगी सामान्य ना हो जाए आपको कोई कदम नहीं उठाना चाहिए सो मैंने भी डिलीट नहीं किया। आखिरकार ये आपके अपने होने जैसा है। आप प्रमोद सिंह जैसे अच्छे लिखाड़ ना हों लेकिन इस ब्लाग के जरिए अपने विचारों को शब्दों में तो ढाल ही सकते हैं ना। राजीव के ब्लाग पर गई तो पता चला कि पूरे ब्लाग जगत को पता है कि मैं क्या कर रही हूं। खैर व्यस्त हूं पर इतनी नहीं कि ब्लाग बिलकुल ना लिख सकूं तो मैं भी वापिस फॉर्म में हूं और अब रोज कुछ ना कुछ लिखती रहूंगी।

17 comments:

आशीष said...

नीलिमा जी यदि हम नहीं लिखेंगे तो कौन लिखेगा....आप तो बस कलम चलती रहिये....

दीपक भारतदीप said...

लिखते रहिये. आप पढ़ते भी रहिये. लिखने को मन कभी नहीं होता पर कुछ पढ़ने को हमेशा लालायित रहता है. जितना पढेंगी उतना ही कुछ लिखने के इच्छा पैदा होगी. कलम और किताब से बेहतर कोई मित्र नहीं होता.
दीपक भारतदीप

शास्त्री जे सी फिलिप् said...

लिखना बंद न करें. कृपया www.sarathi.info प्र पधारें एवं इसके पुरालेखागार (जनप्रिय-लेख, ऊपर की पट्टी पर दिखता है) जाकर नियमित लेखन के लिये मार्गदर्शन देने वाले लेखों पर एक नजर डाल लें -- शास्त्री

हिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती है.
इस काम के लिये मेरा और आपका योगदान कितना है?

prabhakar said...

इस तर्ह के क्षण तो आते ही रहते हैं.पर delete नहीं कीजियेगा

arbuda said...

आपने ठीक ही लिखा है। व्यस्तताओं के बीच लिखने के लिये कभी कभी समय निकाल पाना बहुत मुश्किल हो जाता है, मैं भी इस उलझन को बहुत करीब से महसूस कर रही हूँ। ऐसा लगा कि आपने मेरे मन की बात लिख दी हो।

Nitin Bagla said...

लिखे या ना लिखें...कोई बात नही, मूड और हालात पर निर्भर करता है, लेकिन ब्लाग डिलीट मत कीजियेगा।
भई ब्लाग तो मानस पुत्र की तरह है, सोंचिये कितनी मेहनत लगी है इसे ’बडा’ करने में :)।ऐसे कैसे डिलीट कर देंगे....

Beji said...

अरे ब्लॉग डिलीट कर दोगी तो तुम्हारी मुस्कुराहट देखने कहाँ जाऊँगी?!

तुम्हारी बीजी

manglam said...

सही समय पर सही फैसला, डिलीट बिल्कुल नहीं करना है, हां, इसे समृद्ध करने के प्रयास होते रहने चाहिए।

राजीव जैन said...

अच्‍छा किया आपने
मेरे ब्‍लॉग पर आपने अपने समर्थन में इतने लोगों को देखा तो कम से कम ब्‍लॉग डिलीट करने का फैसला तो नहीं किया आपने।
हालत तो आजकल अपनी भी खराब है, कुछ लिख नही पा रहा, यूं कहिए की काम की अधिकता और घरेलू कामों के चलते फुर्सत नहीं मिल रही। बस इसलिए कमेंट लिखकर ही अपने होने का अहसास करता रहता हूं।
इसी उम्‍मीद में कि व्‍यस्‍तताओं से समय निकालकर भी आप कुछ लिखेंगी

राजीव

उन्मुक्त said...

अरे यह क्या कर रहीं थी। ऐसा मत कीजिये। जब मन में आये, जो अच्छा लगे, लिखिये।

Tarun said...

नीलिमा जी, लिखते रहिये, जब मन ना करे चुप बैठ जाइये लेकिन डिलीट ना करिये। क्या पता कभी लौटने का मन करे।

काकेश said...

आपका फैसला सही है. जल्दी ही आप लिखेंगी ऎसा विश्वास है.

Neelima said...

लिखती रहिए आप ! ब्लॉग जगत में आधी आबादी लायक भी स्त्री ब्लॉगर नहीं हैं अभी ! आप कैसे जा सकती हैं ..?

mamta said...

डिलीट तो बिल्कुल भी नही करना चाहिए . आशा है जल्दी ही आप का लिखा पढने को मिलेगा.

डॉ. दुष्यंत said...

मोहतरमा ज़रूर लिखें लिखती रहें
हमारा लिखना ही हमारे होने की गवाही है

rajendra said...

नीरज की कविता है - चुप रहो/ दो अनुभूति बोले/ आँगन का द्वार/ खुलता नहीं बाहर से खोले.
मगर आप चुप मत हो जाइये. लिखते रहिये. शुभकामनाएं.

अनूप शुक्ल said...

लिखिये। लिखती रहिये।